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Bihar Sec Teacher Hindi Test 348
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Bihar Sec Teacher Hindi Test 348
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  • Question 1/10
    1 / -0.25

    'निलाश्व' शब्द में कौन-सा समास है?
    Solutions
    "निलाश्व" शब्द में कर्मधारय समास है क्योंकि निलाश्व  शब्द का समास विग्रह - नीला है जो अश्व
    कर्मधारय समास - जिसका पहला पद विशेषण एवं दूसरा पद विशेष्य होता है अथवा पूर्वपद एवं उत्तरपद में उपमान – उपमेय का सम्बन्ध माना जाता है कर्मधारय समास कहलाता है।
    अन्य तथ्य - 
    अव्ययीभाव समास - इस समास में पहला पद (पूर्व पद) प्रधान होता है और पूरा पद अव्यय होता है।
    इसमें पहला पद उपसर्ग होता है जैसे अ, आ, अनु, प्रति, हर, भर, नि, निर, यथा, यावत आदि उपसर्ग शब्द का बोध होता है।
    तत्पुरुष समास - इस समास में दूसरा पद (उत्तर पद / अंतिम पद) प्रधान होता है इसमें कर्ता और संबोधन कारक को छोड़कर शेष छ: कारक चिन्हों का प्रयोग होता है।
    जैसे - कर्म कारक, करण कारक, सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक
    द्विगु समास - द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है विग्रह करने पर समूह का बोध होता है।
    द्वंद्व समास - इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह करने पर बीच में 'और' / 'या' का बोध होता है।
  • Question 2/10
    1 / -0.25

    "ठ" वर्ण का उच्चारण स्थान है _____________ और ________ वर्ग है। रिक्त स्थान हेतु सही विकल्प चुनें।
    Solutions

    रिक्त स्थान हेतु सही विकल्प d है। "ठ" वर्ण का उच्चारण स्थान है 'मूर्धा ' और वर्ण '' है।

    वर्णों का वर्ग -

    क् वर्ग- क् ख् ग् घ् ङ्

    च् वर्ग- च् छ् ज् झ् ञ

    ट् वर्ग- ट् ठ् ड् ढ् ण्

    त् वर्ग- त् थ् द् ध् न्

    प् वर्ग- प् फ् ब् भ् म्

    अन्य तथ्य -

    वर्णों का उच्चारण स्थान -

    कण्ठ्य - क् ख् ग् घ् ङ् ह्

    तालव्य - च् छ् ज् झ् ,ञ य् श्

    मूर्धन्य - ट् ठ् ड् ढ् ण् र् ष्

    दन्त्य - त् थ् द् ध् न् ल् स्

    ओष्ठ्य - प् फ् ब् भ् म् व्

  • Question 3/10
    1 / -0.25

    निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द प्रत्यय का प्रयोग कर बनाया गया है?
    Solutions

    दाशरथि शब्द को प्रत्यय के प्रयोग से बनाया गया है।
    दाशरथि – दशरथ + इ
    अन्य विकल्प –
    अतिशय – अति + शय
    निवास – नि + वास
    सुशील – सु + शील

  • Question 4/10
    1 / -0.25

    सबसे अलग रहना इस अर्थ के आधार पर सटीक मुहावरे का प्रयोग करें।
    Solutions

    सबसे अलग रहना इस अर्थ के आधार पर सटीक मुहावरा अपनी खिचड़ी अलग पकाना है।

    मुहावरा अपनी खिचड़ी अलग पकाना

    अर्थ सबसे अलग रहना

    वाक्य प्रयोग रमा अपनी खिचड़ी अलग पकाएगी तो पूरा परिवार कैसे चलेगा।

    अन्य विकल्प

    अक्ल पर पत्थर पड़ना - बुद्धि का काम करना या बुद्धि भ्रष्ट होना

    उंगली पर नचाना - वश में करना

    आग बबूला होना - बहुत क्रोधित होना

    अन्य तथ्य

    मुहावरा

    अरबी भाषा का है जिसका अर्थ है 'अभ्यास होना'

    ऐसा वाक्यांश, जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करे, मुहावरा कहलाता है।

  • Question 5/10
    1 / -0.25

    ''आजकल आप कहाँ रहते है।'' इस वाक्य में सर्वनाम है-
    Solutions
    दिये गये विकल्पों में ''आप'' सर्वनाम शब्द है।
    मध्यम पुरुष - जिन शब्दों का प्रयोग सुनने वाले के लिए किया जाता है।
    जैसे - तुम, तुम्हे, तुमको, तुम्हारा, आप आदि।
    सर्वनाम - वह शब्द जो संज्ञा के बदले में आए उसे सर्वनाम कहते हैं।
    जैसे – मैं , तुम , हम, आप
    सर्वनाम के भेद -
    1. पुरुषवाचक सर्वनाम
    2. निजवाचक सर्वनाम
    3. निश्चयवाचक सर्वनाम
    4. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
    5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
    6. सम्बन्धवाचक सर्वनाम
  • Question 6/10
    1 / -0.25

    दिए गए विकल्पों में से तत्सम शब्द नहीं है -
    Solutions

    दिए गए विकल्पों में अँधा तद्भव शब्द है अँधा का तत्सम रूप अंध है। अत: विकल्प d सही है।

    अन्य विकल्प -

    तत्सम - तद्भव

    अग्नि - आग

    कर्ण - कान

    रात्रि - रात

    अंध - अँधा

    अन्य तथ्य -

    तत्सम शब्द - जो शब्द संस्कृत से हिंदी भाषा में बिना किसी परिवर्तन के अपना लिये जाते है। उन्हें तत्सम शब्द कहते है।

    तद्भव शब्द - तद्भव शब्द वे शब्द हैं जिनमें थोड़ा सा परिवर्तन करके हिंदी में प्रयुक्त किया जाता हैं।

  • Question 7/10
    1 / -0.25

    "वह फर्श पर बैठा है" इस वाक्य में कौन-सा कारक है?
    Solutions

    "वह फर्श पर बैठा है" वाक्य में अधिकरण कारक है।
    अधिकरण कारक - शब्द के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है उसे अधिकरण कारक कहते है। विभक्ति चिह्न - में, पर है।
    अन्य तथ्य - 
    कारक - संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य का सम्बन्ध अन्य शब्दों के साथ स्थापित हो, उसे कारक कहते हैं।
    कारक के भेद -
    कर्ता - ने - काम करने वाला
    कर्म - को - क्रिया से प्रभावित होने वाला
    करण - से, के द्वारा - क्रिया का साधन
    सम्प्रदान - को,के लिए - जिसके लिए क्रिया की सम्पन्न की जाए
    अपादान - से (अलग होने का भाव) - अलगाव, तुलना, आरम्भ, सिखने आदि का बोधक
    सम्बन्ध - का, की, के, ना, नी, ने, रा, री, रे - अन्य पदों से पारस्परिक सम्बन्ध
    अधिकरण - में, पर - क्रिया का आधार (स्थान, समय, अवसर) आदि का बोधक
    संबोधन - ऐ !, हे !, अरे !, अजी !, ओ ! - किसी को पुकारने या बुलाने का बोधक

  • Question 8/10
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश - निम्नलिखित प्रश्न में, चार विकल्पों में से, उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए शब्द का स्त्रीलिंग शब्द वाला विकल्प है।

    ...view full instructions


    विद्वान

    Solutions

    दिए गए विकल्पों में विद्वान का स्त्रीलिंग रूप 'विदुषी' है अतः सही विकल्प ‘विदुषी’ है। अन्य शेष विकल्प असंगत हैं।पुल्लिंग – स्त्रीलिंग
    विद्वान – विदुषी

    अन्य तथ्य -

    लिंग - "संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की नर या मादा जाति का बोध हो, उसे व्याकरण में 'लिंग' कहते है।
    पुल्लिंग - जिन संज्ञा शब्दों से पुरूष जाति का बोध होता है, उसे पुलिंग कहते है।
    जैसे- राजा, घोड़ा, बन्दर
    स्त्रीलिंग - जिस संज्ञा शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते है।
    जैसे- माता, रानी, घोड़ी

  • Question 9/10
    1 / -0.25

    'बटोही' का पर्यायवाची शब्द है।
    Solutions

    दिए गए विकल्पों में बटोही शब्द का पर्यायवाची शब्द यात्री है अन्य शब्द बटोही के पर्यायवाची शब्द नहीं है।
    'बटोही' का पर्यायवाची - पथिक, मुसाफिर, यात्री, राहगीर, पंथी, राही।
    पर्यायवाची - 'पर्याय' का अर्थ है- 'समान' तथा 'वाची' का अर्थ है- 'बोले जाने वाले' अर्थात जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा होता है, उन्हें 'पर्यायवाची शब्द' कहते हैं।

  • Question 10/10
    1 / -0.25

    अहह देखो टूटता है तारा,

    पतन दिल: जले के गात का हो रहा है।

    इस उदाहरण में कौन सा अलंकार है?

    Solutions

    अहह देखो टूटता है तारा, पतन दिल: जले के गात का हो रहा है। पंक्ति मरण उत्प्रेक्षा अलंकार है क्योंकि टूटता तारा (उपमेय ) को दिलजले के देह का पतन (उपमान) मान लिया गया है

    उत्प्रेक्षा अलंकार - जब समानता होने के कारण उपमेय में उपमान के होने कि कल्पना की जाए या संभावना हो तब वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।यदि पंक्ति में -मनु, जनु, जनहु, जानो, मानहु मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि आता है वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

    अन्य विकल्प

    उपमा अलंकार - काव्य में जब किसी व्यक्ति की तुलना दूसरे समान गुण वाले व्यक्ति से की जाती है तब उपमा अलंकार होता है।

    उदाहरण - सीता के पैर कमल समान हैं

    रूपक अलंकार - जहां उपमेय में उपमान का आरोप किया जाए वहाँ रूपक अलंकार होता है।

    उदाहरण:-पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।

    ('राम' नाम में 'रतन धन' का आरोप होने से रूपक अलंकार है।)

    यमक अलंकार - एक ही शब्द, जब दो या दो से अधिक बार आये तथा उनका अर्थ अलग-अलग हो,तो वहाँ पर यमक अलंकार होता है

    उदाहरण :-

    तो पर बारों उरबसी, सुन राधिके सुजान।

    तू मोहन के उरबसी, छबै उरबसी समान।

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