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अहह देखो टूटता है न तारा, पतन दिल: जले के गात का हो रहा है।’ पंक्ति मरण उत्प्रेक्षा अलंकार है क्योंकि टूटता तारा (उपमेय ) को दिलजले के देह का पतन (उपमान) मान लिया गया है
उत्प्रेक्षा अलंकार - जब समानता होने के कारण उपमेय में उपमान के होने कि कल्पना की जाए या संभावना हो तब वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।यदि पंक्ति में -मनु, जनु, जनहु, जानो, मानहु मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि आता है वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
अन्य विकल्प –
उपमा अलंकार - काव्य में जब किसी व्यक्ति की तुलना दूसरे समान गुण वाले व्यक्ति से की जाती है तब उपमा अलंकार होता है।
उदाहरण - सीता के पैर कमल समान हैं
रूपक अलंकार - जहां उपमेय में उपमान का आरोप किया जाए वहाँ रूपक अलंकार होता है।
उदाहरण:-पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
('राम' नाम में 'रतन धन' का आरोप होने से रूपक अलंकार है।)
यमक अलंकार - एक ही शब्द, जब दो या दो से अधिक बार आये तथा उनका अर्थ अलग-अलग हो,तो वहाँ पर यमक अलंकार होता है ।
उदाहरण :-
तो पर बारों उरबसी, सुन राधिके सुजान।
तू मोहन के उरबसी, छबै उरबसी समान।