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Directions For Questions
हरे-भरे विस्तार गाँव हैं
खेत और खलिहान गाँव हैं
लोक धुनों पर नृत्य दिखाते लोगों के उत्साह गाँव हैं।
कल-कल, छल-छल बहती नदियाँ चिड़ियों के मधुगान गाँव हैं
हँसी-ठहाके या मुस्कान के पहचाने-से नाम गाँव हैं।
आस और विश्वास गाँव हैं
खुशहाली की छाँव गाँव हैं
नहीं दिखावा तनिक कहीं भी निश्छलता के नाम गाँव हैं।
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ग्रामीणों की निश्छलता का प्रमाण है।
• पद्यांश से स्पष्ट होता है कि ग्रामीणों में दिखावा न होना ही उनके निश्छल होने का प्रमाण है।
• निश्छलता का अर्थ - निश्छल होने की अवस्था या भाव, सच्चाई, ईमानदारी
• पद्य से नहीं दिखावा तनिक कहीं भी निश्छलता के नाम गाँव हैं।
• दिए गए विकल्पों में गरीबी का विलोम ‘खुशहाली’ है शेष विकल्प असंगत है।
• गरीबी शब्द के विलोम शब्द – खुशहाली
• विलोम शब्द - जो शब्द विपरीत या उल्टा अर्थ बताते हैं।
पद्यांश में निहित समानार्थी शब्द “हंसी-ठिठोली” है। जिनका अर्थ है हंसना।
हंसी के समानार्थी - मुस्कान, मुस्कारहट, ठहाका, खिलखिलाहट, मजाक
शेष विकल्प –
खेत के समानार्थी - कृषिक्षेत्र, कृषि-भूम,क्षेत्र, मैदान, खेत, भूमि, रणभूमि, विस्तार
आस के समानार्थी - उम्मीद, आशा, भरोसा
• गांव में वर्ष भर हरियाली और गांव क्षेत्रफल में बड़े (विस्तृत) होते हैं इसलिए गांवों को हरे भरे विस्तार कहा गया है।
• पद्यांश से - हरे-भरे विस्तार गाँव है।
• कल-कल, छल-छल बहती नदियां के स्वर है।
• पद्यांश से - कल-कल, छल-छल बहती नदियाँ चिड़ियों के मधुगान गाँव हैं
• लोक धुन से तात्पर्य है लोगों की धुन।
• किसी गीत या संगीत की विशेष धुन जिसे किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं एक समाज विशेष द्वारा बनाई तथा प्रयोग में लाई जाती है।
• मुख्य रूप से यह ग्रामीण अंचल से निकली होता है।
कादम्बिनी हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की एक सामाजिक व साहित्यिक पत्रिका है जो नई दिल्ली से प्रकाशित होती है।
सन् 1960 में शुरू हुई कादम्बिनी पत्रिका ने एक खास मुकाम बनाए हुए हैं। राजेन्द्र अवस्थी ‘कादंबिनी’ पत्रिका के संपादक हैं
दिए गये विकल्पों में राजेन्द्र यादव ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता नहीं है अन्य सभी विकल्प ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता हैं।
ज्ञानपीठ पुरस्कार - भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है।
पैरों में पंख बांधकर (1952 ई०) रचना राम वृक्ष बेनीपुरी की हैं।
अन्य विकल्प -
अज्ञेय - भग्नदूत (1933), चिन्ता (1942), इत्यलम् (1946), बावरा अहेरी (1954), अरी ओ करुणा प्रभामय (1959), आँगन के पार द्वार (1961), कितनी नावों में कितनी बार (1967)
सूरदास - सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य-लहरी, नल-दमयन्ती
जयशंकर प्रसाद - महाराणा का महत्त्व, चित्राधार, कानन कुसुम, झरना, आँसू, लहर, कामायनी
देखकर सहसा हुआ शुक मौन है, सोचता है अन्य शुक यह कौन है ?
उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ?
यहां नाक में तोते का और दन्त पंक्ति में अनार के दाने का भ्रम हुआ है , यहां भ्रान्तिमान अलंकार है !
भ्रान्तिमान - उपमेय में उपमान की भ्रान्ति होने से और तदनुरूप क्रिया होने से भ्रान्तिमान अलंकार होता है
दिए गए विकल्पों में से ‘काज’ शब्द तद्भव हैं। अत: विकल्प D सही हैं।
अन्य विकल्प तत्सम शब्द हैं।
तत्सम – तद्भव
अश्रु – आँसू
अंध – अंधा
हस्त – हाथ
तत्सम शब्द - तत्सम दो शब्दों से मिलकर बना है – तत + सम
जिसका अर्थ होता है ज्यों का त्यों। जिन शब्दों को संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के ले लिया जाता है उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं।
तद्भव शब्द - समय और परिस्थिति की वजह से तत्सम शब्दों में जो परिवर्तन हुए हैं उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।
संस्कृति के चार अध्याय हिन्दी के विख्यात साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित एक भारतीय संस्कृति का सर्वेक्षण है जिसके लिये उन्हें सन् 1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
गुलेरी जी ने तीन (सुखमय जीवन, बुद्धू का कांटा, उसने कहा था) कहानियां लिखीं । उनकी पहली रचना ''उसने कहा था'' थी। इस एक कहानी को ही अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली, गुलेरी जी को आधुनिक कहानी माना जाता है जिसने हिन्दी कहानी को एक नई दिशा प्रदान की।
मगही पश्चिमी हिन्दी की बोली नहीं है, बल्कि यह पूर्वी हिन्दी की बोली है।
पश्चिमी हिन्दी - 1. खड़ी बोली (कौरवी) 2. ब्रजभाषा 3. हरियाणवी या बाँगरु 4. बुन्देली 5. कन्नौजी
पूर्वी हिन्दी - 1. अवधी 2. बघेली 3. छत्तीसगढ़ी
हिंदी भाषा की बोलियाँ –
अपभ्रंश
उपभाषा
बोलियाँ
शौरसेनी
पश्चिम हिंदी
हरियाणी, कौरवी, ब्रजभाषा, बुंदेली , कन्नौजी
राजस्थानी
मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, मालवी
पहाड़ी
नेपाली, कुमाऊँनी, गड़वाली
मागधी
बिहारी
भोजपुरी, मगही, मैथिली
अर्धमागधी
पूर्वी हिंदी
अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
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