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Bihar Sec Teacher Hindi Test 311
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Bihar Sec Teacher Hindi Test 311
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  • Question 1/10
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    वज्रयान, महायान और हीनयान ये तीन शाखाएं किस परम्परा में उदित हुई?
    Solutions
    • महासुखवाद’ का प्रवर्तन वज्रयान शाखा में हुआ।
    • महासुख’ का अर्थ है आनंदस्वरूप ईश्वरत्व।
    • प्रज्ञा और उपाय के योग से एस ‘महासुख’ दशा की प्राप्ति मानी गयी है।
    • सिद्धों की संख्या 84 मानी गयी है।
    • वज्रयान, महायान और हीनयान ये तीन शाखाएं सिद्ध परम्परा में उदित हुयी।
  • Question 2/10
    1 / -0.25

    निम्नलिखित में से 'आनन्द कादम्बिनी' के सम्पादक कौन थे?
    Solutions

    आनंद कादम्बिनी के संपादक बद्रीनारायण चौधरी प्रेमधन थे। उन्होंने इस मासिक पत्रिका का प्रकाशन 19वीं सदी के शुरुआत के समय शुरू किया था। आनन्द कादम्बिनी मासिक पत्र था जिसका प्रकाशन मिर्जापुर से होता था।
    अन्य तथ्य - 
    भारतेन्दु के प्रमुख पत्र 'कविचन सुधा,'हरिश्चन्द्र मैगजीन' इसके आठ अंकों के बाद नाम बदलकर 'हरिश्चन्द्र चन्द्रिका' कर दिया गया तथा सन् 1874 में भारतेन्दु जी ने नारी शिक्षा के लिए 'बाल बोधिनी' पत्रिका निकाली।

  • Question 3/10
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    किस लेखक के इतिहास ग्रंथ में सर्वप्रथम हिन्दी साहित्य का काल विभाजन मिलता है?
    Solutions

    सर्वप्रथम जॉर्ज ग्रियर्सन ने अपने इतिहास ग्रंथ “द माडर्न वर्मास्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान" में काल विभाजन किया।

    ग्रियर्सन ने हिन्दी साहित्य का काल विभाजन -

    1. चारण काल

    2. पन्द्रहवी शती का धार्मिक पुनर्जागरण

    3. जायसी की प्रेम कविता

    4. ब्रज का कृष्ण सम्प्रदाय

    5. मुगलदरबार

    6. तुलसीदास

    7. रीतिकाव्य

    8. तुलसीदास के अन्य परवर्ती

    9. अट्ठारवीं शताब्दी

    10. कंपनी के शासन में हिंदुस्तान

    11. महारानी विक्टोरिया के शासन में हिंदुस्तान

    अन्य तथ्य –

    शिव सिंह सेंगर का इतिहासग्रंथ - 'शिव सिंह सरोज'

    महेशदत्त शुक्ल का इतिहास ग्रंथ - 'भाषा काव्य संग्रह'

    मौलवी करीमुद्दीन का इतिहास ग्रन्थ - 'तजकिरा-ई-शुअराई

  • Question 4/10
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    अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का सर्वप्रथम हिंदी अनुवाद किसने किया था?
    Solutions

    • ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ का सर्वप्रथम हिंदी अनुवाद राजा लक्ष्मण सिंह (1826-1896) ने किया था।

    अभिज्ञान शाकुन्तलम् महाकवि कालिदास का विश्वविख्यात नाटक है।

    इसमें राजा दुष्यन्त तथा शकुन्तला के प्रणय, विवाह, विरह, प्रत्याख्यान तथा पुनर्मिलन की एक सुन्दर कहानी है।

  • Question 5/10
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    'नौकर की कमीज' किस विधा की रचना है?

    Solutions

    नौकर की कमीज़, विनोद कुमार शुक्ल द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसका प्रथम प्रकाशन सन् 1994 में हुआ था।

    नौकर की कमीज भारतीय जीवन के यथार्थ और आदमी की कशमकश को प्रस्तुत करने वाला उपन्यास है।

    अन्य तथ्य –

    दीवार में एक खिड़की रहती थी (1997) जिसे साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी नवाजा गया था, के बाद शुक्ल जी का सर्वाधिक बहुचर्चित उपन्यास है

  • Question 6/10
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    'मानस का हंस' उपन्यास के लेखक हैं
    Solutions

    'मानस का हंस' के लेखक अमृत लाल नागर हैं। इसमें उन्होंने तुलसी की कथा का निरूपण किया है।

    इनकी अन्य रचनाएं हैं - अमृत और विष, महाकाल, शतरंज की मोहरें, खंजन नयन, एकदा नैमिषारण्यें आदि।

  • Question 7/10
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    निम्नलिखित कहानियों को उनके कहानी संग्रह के साथ सुमेलित कीजिए-

    कहानी - कहानी संग्रह

    a. अपना अपना भाग्य - 1) सीधे सीधे मित्र

    b. इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर – 2) पटरियां समूह

    c. अमृतसर आ गया - 3) ठिठुरता हुआ गणतंत्र

    d. राही - 4) वातायन

    सही विकल्प का चुनाव करें-

    Solutions

    अपना अपना भाग्य कहानी का प्रथम प्रकाशन वातायन में हुआ था।

    इंस्पेक्टर मातादीन चांद परकहानी सर्वप्रथम ठिठुरता हुआ गणतंत्र संग्रह में प्रकाशित हुई।

    अमृतसर आ गया भीष्म साहनी की चर्चित कहानी है। यह उनके पटेरिया समूह में प्रकाशित है।

    सुभद्रा कुमारी चौहान का प्रसिद्ध कथा संग्रह सीधेसाधे मित्र है। 1947 में राही कहानी सीधे-साधे मित्र कहानी संग्रह में प्रकाशित हुई।

  • Question 8/10
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    हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित पहला उपन्यास कौन सा है?
    Solutions

    हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित प्रथम उपन्यास है बाणभट्ट की आत्मकथा (1946)

    हजारीप्रसाद द्विवेदी के अन्य उपन्यास हैं- चारुचंद्र लेख (1963), पुनर्नवा (1973), अनामदास का पोथा (1976)

  • Question 9/10
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    भाषा विकास की दृष्टि से सही अनुक्रम है :
    Solutions

    भाषा का विकास -

    पालि (500ई पू- 1 ई. ), प्राकृत (1ई. - 500ई. ), अपभ्रंश (500ई-1000ई. ), हिंदुस्तानी (1000ई. के बाद) के रूप में दिखाई देता है।

  • Question 10/10
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    विरहनी बावरी सी भई

    ऊँची चढ़ि अपने भवन में टेरत हाय दई

    ले अंचरा मुख अँसुवन पोंछत उधरे गात सही’ - किसकी पंक्ति है?

    Solutions

    * ‘विरहनी बावरी सी भई, ऊँची चढ़ि अपने भवन में टेरत हाय दई, ले अंचरा मुख अँसुवन पोंछत उधरे गात सही’ - पंक्तियाँ 'मीराबाई' द्वारा रचित हैं।

    * इन पंक्तियों में मीरा जी ने कृष्ण के प्रति अपनी विरह भावना को दर्शाया है।

    अन्य तथ्य –

    * मीराबाई की कृतियाँ - 'गीतगोविन्द टीका, नरसी जी का मायरा, रागगोविन्द आदि हैं।

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