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दिए गए विकल्पों में “कर्पट” का तद्भव रूप ‘कपड़ा’ है। शेष विकल्प असंगत है।
तत्सम - तद्भव
कर्पट - कपड़ा
अन्य तथ्य –
तत्सम शब्द - जो शब्द संस्कृत से हिंदी भाषा में बिना किसी परिवर्तन के अपना लिये जाते है। उन्हें तत्सम शब्द कहते है।
तद्भव शब्द - तद्भव शब्द वे शब्द हैं जिनमें थोड़ा सा परिवर्तन करके हिंदी में प्रयुक्त किया जाता है।
दिए गए विकल्पों में “कपोत” का तद्भव रूप ‘कबूतर’ है। शेष विकल्प असंगत है।
कपोत – कबूतर
दिए गए विकल्पों में “स्कंध” का तद्भव रूप ‘कंधा’ है। शेष विकल्प असंगत है।
स्कंध – कंधा
दिए गए विकल्पों में “भ्रमर” का तद्भव रूप ‘भौरा’ है। शेष विकल्प असंगत है।
भ्रमर – भौरा
दिए गए विकल्पों में “मक्षिका” का तद्भव रूप ‘मक्खी’ है। शेष विकल्प असंगत है।
मक्षिका - मक्खी
पराजय शब्द में उपसर्ग - परा + जय ( परा उपसर्ग है )
पराजय शब्द का अर्थ - हार, शिकस्त
परा उपसर्ग का अर्थ - पीछे
उपसर्ग - उपसर्ग दो शब्दों से मिलकर बना है उप (समीप) + सर्ग (सृष्टि करना) का अर्थ है- किसी शब्द के समीप आ कर नया शब्द बनाना। जो शब्दांश शब्दों के प्रारंभ में जुड़ कर उनके अर्थ में कुछ विशेषता लाते हैं, ऐसे शब्दों को उपसर्ग कहते हैं।
दुरवस्था’ में ‘दुर्’ उपसर्ग है। दुर् उसर्ग का अर्थ बुरा होता है जहा अवस्था का अर्थ हालात होता है शब्दों के मेल से नया शब्द बुरे हालात बनता है।
अभिशाप’ शब्द में उपसर्ग ‘अभि’ है।
निरपराध शब्द = निर् + अपराध (निर् उपसर्ग जुड़ा हैं।)
निर् उपसर्ग का अर्थ - निरपराध, निर्जन, निराकार, निर्गुण इन सभी में निर उपसर्ग जुड़ा हैं।
उपसर्ग ऐसे शब्द होते है जो अन्य शब्दो के आगे लगकर, नए शब्दों का निर्माण करता है उपसर्ग कहलाते है
उपसर्ग शब्द + अन्य शब्द = नये शब्द
दिए गए विकल्पों में से 'अत्यंत' शब्द में “अति” उपसर्ग का प्रयोग हुआ है अत: विकल्प d प्रश्न का सही उत्तर होगा।
अत्यंत - अति (उपसर्ग) + अंत (मूल शब्द)
अति उपसर्ग का अर्थ – अधिकता
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