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रिक्त स्थान को भरने के लिए उपयुक्त शब्द का चयन करें।
अध्यापक के कक्षा ________ ही सभी बच्चे शरारतें करने लगे।
दिए गए वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ती हेतु ‘से जाते’ शब्द सार्थक है। अत: सही विकल्प ‘B’ है।
पूर्ण सार्थक वाक्य – अध्यापक के कक्षा से जाते ही सभी बच्चे शरारतें करने लगे|
अध्यापक के कक्षा से आते ही सभी बच्चे शरारतें करने लगे|
- अर्थहीन
अध्यापक के कक्षा को आते ही सभी बच्चे शरारतें करने लगे|
अध्यापक के कक्षा को जाते ही सभी बच्चे शरारतें करने लगे|
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द देशज है ?
देशज शब्द- वे शब्द जिनकी व्युत्पत्ति की जानकारी नहीं है, बोल चाल के आधार पर स्वत: निर्मित हो जाते हैं, उसे देशज शब्द कहते हैं। इन्हें देशी शब्द भी कहा जाता है। गड़बड़ शब्द देशज शब्द है अन्य शब्द विदेशज शब्द है।
अरबी भाषा से हिंदी भाषा में लिए गए शब्द -
अजीब , अमीर , अक्ल , असर
फारसी भाषा से हिंदी में लिए गए शब्द -
अफ़सोस , गोला , चाबुक , जहर
तुर्की भाषा से हिंदी में लिए गए शब्द -
काबू , कालीन , कैंची , कुली
दिए गए वाक्यांश के लिए उचित शब्द का चयन कीजिए।
"आशा से बहुत अधिक"
आशा से बहुत अधिक - आशातीत
अन्य शब्दों के अर्थ -
अप्रत्याशित का अर्थ - जिसकी आशा न रही हो।
आशावान का अर्थ - आशा रखनेवाला
निम्न में से "सर्वेश्वर" शब्द में कौन- सी संधि है?
संधि - दो वर्णों के मेल को संधि कहते है।
सर्वेश्वर का संधि विच्छेद = सर्व+ ईश्वर ( गुण संधि )
नियम = अ+ ई= ए
गुण संधि - जब संधि करते समय (अ, आ) के साथ (इ, ई) हो तो ‘ए‘ बनता है, जब (अ, आ) के साथ (उ, ऊ) हो तो ‘ओ‘ बनता है, जब (अ, आ) के साथ (ऋ) हो तो ‘अर‘ बनता है तो यह गुण संधि कहलाती है।
"नए उपग्रह खोजे जा रहे है।" वाक्य में काल है-
वर्तमान काल:- क्रिया के जिस रूप से वर्तमान में चल रहे समय का बोध होता है, उसे वर्तमान काल कहते है।
तत्कालिक वर्तमानकाल- क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि कार्य वर्तमानकाल में हो रहा है उसे तात्कालिक वर्तमानकाल कहते हैं।
नए उपग्रह खोजे जा रहे है। वाक्य यह पता चलता है कि कार्य वर्तमानकाल में हो रहा है, नए उपग्रह खोजे नहीं है कार्य चल रहा है यदि उपग्रह खोजे जा चुके होते तो पूर्ण वर्तमान काल होता परन्तु कार्य वर्तमान में चल रहा है पूर्ण नहीं हुआ है अत: तत्कालिक वर्तमानकाल होगा ।
Directions For Questions
निर्देश: दिए गए गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इनके द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय सभ्यता के इतिहास का जीता-जागता गवाह है। इसी के बल पर वर्तमान भारत को अपने अतीत के गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय भारत के लिए कोई नई वस्तु नहीं है। लिपि के आविष्कार से आज तक लोग निरन्तर पुस्तकों का संग्रह करते रहे हैं। पहले देवालय, विद्यालय और नृपालय इन संग्रहों के प्रमुख स्थान होते थे। इनके अतिरिक्त, विद्वज्जनों के अपने निजी पुस्तकालय भी होते थे। मुद्रणकला के आविष्कार से पूर्व पुस्तकों का संग्रह करना आजकल की तरह सरल बात न थी। आजकल साधारण स्थिति के पुस्तकालय में जितनी सम्पत्ति लगती है, उतनी उन दिनों कभी-कभी एक-एक पुस्तक की तैयारी में लग जाया। करती थी। भारत के पुस्तकालय संसार भर में अपना सानी नहीं रखते थे। प्राचीनकाल से लेकर मुगल सम्राटों के समय तक यही स्थिति रही। चीन, फारस प्रभृति सुदूर स्थित देशों के झुण्ड विद्यानुरागी लम्बी यात्राएँ करके भारत आया। करते थे।
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पुस्तकालयों के द्वारा किसके जीवन की रक्षा, पुष्टि और अभिवृद्धि होती है?
पुस्तकालयों के द्वारा साहित्य के जीवन की रक्षा, पुष्टि व अभिवृद्धि होती है। साहित्योन्नति के साधनों में पुस्तकालयों का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। साहित्य के माध्यम से ही भारत के अतीत के गौरव के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
साहित्य की उन्नति के साधनों में महत्त्वपूर्ण स्थान किसका है?
साहित्य की उन्नति के साधनों में महत्त्वपूर्ण स्थान पुस्तकालय का है। पुस्तकालय के माध्यम से ही साहित्य के जीवन की रक्षा व अभिवृद्धि होती है। पुस्तकालय वास्तव में सभ्यता के इतिहास का एक जीवन्त उदाहरण है। इसी के आधार पर भारत के धार्मिक, राजनैतिक व सामाजिक जीवन के विषय में जानकारी प्राप्त होती है।
सभ्यता के इतिहास का जीता-जागता गवाह है
सभ्यता के इतिहास का एक जीता-जागता गवाह पुस्तकालय है। इसी के आधार पर वर्तमान भारत को अपने अतीत के गौरव पर गर्व है। पुस्तकालय वास्तव में वह स्थान है जो विविध प्रकार के ज्ञान, सूचनाओं, स्रोत व सेवाओं का संग्रह करता है। पुस्तकालयों का अपना क्षेत्र व उददेश्य अलग होता है तथा अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए वे अनुकूल रूप धारण करते हैं, जैसे-राष्ट्रीय पुस्तकालय, सार्वजनिक पुस्तकालय, व्यावसायिक पुस्तकालय व शिक्षण संस्थानों के पुस्तकालय आदि।
मुद्रण कला के आविष्कार के पहले कौन-सा कार्य कठिन था?
मुद्रणकला के आविष्कार के पहले पुस्तकों का संग्रह करना एक कठिन कार्य था। वर्णमाला के अक्षरों का समूह बनाकर उस पर स्याही लगाकर छापने की कला मुद्रणकला कहलाती है। मुद्रणकला के आविष्कार व विकास का श्रेय 'चीन' को दिया जाता है। संसार की पहली मुद्रित पुस्तक 'हीरक सूत्र' सर्वप्रथम 650 ई. में चीन में ही प्रकाशित की गयी थी। भारत में मुद्रणकला की शुरुआत 16वीं शताब्दी में सर्वप्रथम पुर्तगालियों द्वारा गोवा में की गयी।
उपरोक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है।
उपरोक्त गद्यांश का उचित शीर्षक 'पुस्तकालय व भारत' है। साहित्य की उन्नति के साधन के रूप में पुस्तकालय का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है जबकि भारत के पुस्तकालय का संसार भर में कोई सान नहीं था।चीन, फारस, अरब देशों के विद्यानुराग यात्री लम्बी यात्राएं करके दर्शन, विज्ञान व धर्म का अध्ययन करने भारत आया करते थे।
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