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Directions For Questions
दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।
पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,
पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार बार,
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पड़ा ताल
दर्पण सा फैला है विशाल
गिरी के गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों से मुन्दर
झरते है झाग भरे निर्झर
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‘दर्पण सा फैला है विशाल’ में कौन सा अलंकार है?
‘अनुप्रास’ अर्थात जिस पंक्ति में एक या एक से अधिक बार वर्णों की आवृत्ति होती है; उदाहरण: ‘सक सर एक सोशि सत सागर’ (स वर्ण की उत्पत्ति), ‘उपमा’ अर्थात जहाँ उपमेय की उपमान से तुलना की गयी हो (सा, से, सी, जैसे, इत्यादि), ‘पुनरुक्ति’ अर्थात जहाँ एक ही शब्द की उत्पत्ति एक से अधिक बार हुई हो (पग-पग, झर-झर, इत्यादि) तथा ‘मानवीकरण’ अर्थात जहाँ अमानवीय वस्तुओं की तुलना मानवीय गुणों से की जाती है। अतः इस आधार पर सही विकल्प उपमा अलंकार है।
‘मेखलाकार’ में कौन सा समास है?
‘तत्पुरुष’ समास अर्थात जिसमें बाद का अथवा उत्तर पद प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच का कारक-चिह्न लुप्त हो जाता है, ‘कर्मधारय’ समास अर्थात जिसमें उत्तर पद प्रधान हो तथा पूर्व पद व उत्तर पद में उपमान-उपमेय अथवा विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध होता है, ‘द्विगु’ समास अर्थात जिसमें पूर्व पद संख्यावाचक होता है तथा ‘द्वंद्व’ समास अर्थात जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' लगता है। ‘मेखलाकार’ अर्थात ‘मेखला के आकार का’ जिसमें समास के बाद कारक चिन्हों का लोप हुआ है। अतः सही विकल्प तत्पुरुष समास है।
‘ऋतु’ उत्पत्ति की दृष्टि से कौन सा शब्द है?
‘तत्सम’ अर्थात वह शब्द जिन्हें बिना किसी परिवर्तन के संस्कृत से हिन्दी में शामिल कर लिया गया हो, ‘तद्भव’ अर्थात वह शब्द जिन्हें कुछ बदलाव के साथ हिन्दी में शामिल किया गया हो, ‘देशज’ अर्थात वह शब्द जो किसी लोक या ग्रामीण से जुडी हुई हो तथा ‘विदेशज’ अर्थात वह शब्द जिनकी व्युत्पत्ति अन्य देश के भाषा-भाषियों से हुई है। ‘ऋतु’ एक संस्कृत शब्द है अतः सही विकल्प तत्सम है।
‘पावस’ का पर्यायवाची शब्द क्या होगा?
‘पवन’ अर्थात ‘हवा, समीर’, ‘आग’ अर्थात ‘अग्नि, पावक’, ‘आब’ अर्थात ‘पानी, जल’ तथा ‘बारिश’ अर्थात ‘पावस’, वर्षा’। अतः सही विकल्प बारिश है।
किसके चरणों में ताल है?
दी गयी कविता में पर्वतों का चित्रण किया गया है। उसमें जल का विवरण देते हुए बताया गया है कि पर्वतों के ऊपर से नीचे बह रहे जल के चरणों में ताल है। अतः सही विकल्प जल है।
कौन बार-बार अवलोकन कर रहा है?
कविता में पर्वतों का बखान करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि मेखलाकार पर्वत अपने बड़े बड़े नयनों से सब कुछ देख रहे हैं। अतः इस आधार अपर सही विकल्प पर्वत है।
प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है
मानव प्रधानत: अपनी अनुभुतियों तथा मनोवेगों की अभिव्यक्ति मौखिक भाषा में ही करता है क्योंकि भावों की अभिव्यक्ति का साधन साधारणत: उच्चरित भाषा ही होती है। मौखिक अभिव्यक्ति से तात्पर्य मन के विचारों को स्वतंत्र रूप से बोल कर अभिव्यक्त करने से है।
मौखिक अभिव्यक्ति के महत्त्व:
Important Point
'कहानी सुनकर उसे अपनी भाषा में कहना' प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है क्योंकि कहानी के मौखिक वर्णन करने के दौरान बच्चे:
अतः निष्कर्ष निकलता है कि 'कहानी सुनकर उसे अपनी भाषा में कहना' प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है।
Additional Information
प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से अन्य महत्त्वपूर्ण गतिविधि:
भाषा-अर्जन के सम्बन्ध में कौन-सा कथन उचित नहीं है?
भाषा-अर्जन उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसमें बालक भाषा को ग्रहण करने व समझने की क्षमता अर्जित करता है।
अतः, भाषा अर्जित करने के संदर्भ में बच्चों को नियम बनाना सिखाया जाता है, कथन उचित नहीं है।
भाषा शिक्षक का विशेष अनिवार्य गुण है-
शिक्षक, शिक्षा के कार्यान्वयनकर्ता होते हैं इसलिए उन्हें विभिन्न गुणों से परिपूर्ण होना चाहिए ताकि उनके द्वारा शिक्षण प्रक्रिया को सही दिशा मिल सके। वैसे तो सभी गुण सभी शिक्षकों में होने चाहिए परंतु, भाषा शिक्षक में एक विशेष गुण 'उच्चारण की शुद्धता' का होना अनिवार्य है।
शिक्षक के अन्य गुण:
अतः स्पष्ठ है भाषा शिक्षक का अनिवार्य गुण शुध्द उच्चारण है।
प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं है:
भाषा शिक्षण बच्चों में बच्चों में संप्रेषण कुशलता तथा मौलिकता को विकसित कर उन्हें विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग में सफल बनाने से संबंधित है। प्राथमिक स्तर पर भाषा के द्वारा प्राप्त आधारभूत कौशल दूसरे क्षेत्रों के संप्रत्ययों को समझने में सहायक होता है। भाषा शिक्षण का उद्देश्य भाषा की समझ और अभिव्यक्ति का विकास करना है।
प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण का उद्देश्य बच्चों में भाषा की समझ और सहज अभिव्यक्ति के विकास को सुनिश्चित करना होता है। यह बच्चों में संप्रेषण कौशल को दक्ष करती है जिससे बच्चे विभिन्न संदर्भ में भाषा प्रयोग में सफल होते हैं। अपने मनोभाव को किसी के सामने आसानी से रख पाना ही भाषा शिक्षण को सार्थक बनाता है।
प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण के कुछ मुख्य उद्देश्य:
Hint
अतः, निष्कर्ष निकलता है कि व्याकरण के नियमों को कंठस्थ करना प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं है।
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