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CTET 2021 Hindi Test - 38
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CTET 2021 Hindi Test - 38
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  • Question 1/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

    पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।

    मेखलाकार पर्वत अपार

    अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,

    अवलोक रहा है बार बार,  

    नीचे जल में निज महाकार,

    जिसके चरणों में पड़ा ताल

    दर्पण सा फैला है विशाल

    गिरी के गौरव गाकर झर-झर

    मद में नस-नस उत्तेजित कर

    मोती की लड़ियों से मुन्दर

    झरते है झाग भरे निर्झर

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    ‘दर्पण सा फैला है विशाल’  में कौन सा अलंकार है?

    Solutions

    ‘अनुप्रास’ अर्थात जिस पंक्ति में एक या एक से अधिक बार वर्णों की आवृत्ति होती है; उदाहरण: ‘सक सर एक सोशि सत सागर’ (स वर्ण की उत्पत्ति), ‘उपमा’ अर्थात जहाँ उपमेय की उपमान से तुलना की गयी हो (सा, से, सी, जैसे, इत्यादि), ‘पुनरुक्ति’ अर्थात जहाँ एक ही शब्द की उत्पत्ति एक से अधिक बार हुई हो (पग-पग, झर-झर, इत्यादि) तथा ‘मानवीकरण’ अर्थात जहाँ अमानवीय वस्तुओं की तुलना मानवीय गुणों से की जाती है। अतः इस आधार पर सही विकल्प उपमा अलंकार है।

     

  • Question 2/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

    पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।

    मेखलाकार पर्वत अपार

    अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,

    अवलोक रहा है बार बार,  

    नीचे जल में निज महाकार,

    जिसके चरणों में पड़ा ताल

    दर्पण सा फैला है विशाल

    गिरी के गौरव गाकर झर-झर

    मद में नस-नस उत्तेजित कर

    मोती की लड़ियों से मुन्दर

    झरते है झाग भरे निर्झर

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    ‘मेखलाकार’ में कौन सा समास है?

    Solutions

    ‘तत्पुरुष’ समास अर्थात जिसमें बाद का अथवा उत्तर पद प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच का कारक-चिह्न लुप्त हो जाता है, ‘कर्मधारय’ समास अर्थात जिसमें उत्तर पद प्रधान हो तथा पूर्व पद व उत्तर पद में उपमान-उपमेय अथवा विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध होता है, ‘द्विगु’ समास अर्थात जिसमें पूर्व पद संख्यावाचक होता है तथा ‘द्वंद्व’ समास अर्थात जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर 'और', 'अथवा', 'या', 'एवं' लगता है। ‘मेखलाकार’ अर्थात ‘मेखला के आकार का’ जिसमें समास के बाद कारक चिन्हों का लोप हुआ है। अतः सही विकल्प तत्पुरुष समास है।

     

  • Question 3/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

    पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।

    मेखलाकार पर्वत अपार

    अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,

    अवलोक रहा है बार बार,  

    नीचे जल में निज महाकार,

    जिसके चरणों में पड़ा ताल

    दर्पण सा फैला है विशाल

    गिरी के गौरव गाकर झर-झर

    मद में नस-नस उत्तेजित कर

    मोती की लड़ियों से मुन्दर

    झरते है झाग भरे निर्झर

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    ‘ऋतु’ उत्पत्ति की दृष्टि से कौन सा शब्द है?

    Solutions

    ‘तत्सम’ अर्थात वह शब्द जिन्हें बिना किसी परिवर्तन के संस्कृत से हिन्दी में शामिल कर लिया गया हो, ‘तद्भव’ अर्थात वह शब्द जिन्हें कुछ बदलाव के साथ हिन्दी में शामिल किया गया हो, ‘देशज’ अर्थात वह शब्द जो किसी लोक या ग्रामीण से जुडी हुई हो तथा ‘विदेशज’ अर्थात वह शब्द जिनकी व्युत्पत्ति अन्य देश के भाषा-भाषियों से हुई है। ‘ऋतु’ एक संस्कृत शब्द है अतः सही विकल्प तत्सम है।

     

  • Question 4/10
    1 / -0

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    दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

    पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।

    मेखलाकार पर्वत अपार

    अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,

    अवलोक रहा है बार बार,  

    नीचे जल में निज महाकार,

    जिसके चरणों में पड़ा ताल

    दर्पण सा फैला है विशाल

    गिरी के गौरव गाकर झर-झर

    मद में नस-नस उत्तेजित कर

    मोती की लड़ियों से मुन्दर

    झरते है झाग भरे निर्झर

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    ‘पावस’ का पर्यायवाची शब्द क्या होगा?

    Solutions

    ‘पवन’ अर्थात ‘हवा, समीर’, ‘आग’ अर्थात ‘अग्नि, पावक’, ‘आब’ अर्थात ‘पानी, जल’ तथा ‘बारिश’ अर्थात ‘पावस’, वर्षा’। अतः सही विकल्प बारिश है।

     

  • Question 5/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

    पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।

    मेखलाकार पर्वत अपार

    अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,

    अवलोक रहा है बार बार,  

    नीचे जल में निज महाकार,

    जिसके चरणों में पड़ा ताल

    दर्पण सा फैला है विशाल

    गिरी के गौरव गाकर झर-झर

    मद में नस-नस उत्तेजित कर

    मोती की लड़ियों से मुन्दर

    झरते है झाग भरे निर्झर

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    किसके चरणों में ताल है?

    Solutions

    दी गयी कविता में पर्वतों का चित्रण किया गया है। उसमें जल का विवरण देते हुए बताया गया है कि पर्वतों के ऊपर से नीचे बह रहे जल के चरणों में ताल है। अतः सही विकल्प जल है।

     

  • Question 6/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।

    पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,

    पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश।

    मेखलाकार पर्वत अपार

    अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,

    अवलोक रहा है बार बार,  

    नीचे जल में निज महाकार,

    जिसके चरणों में पड़ा ताल

    दर्पण सा फैला है विशाल

    गिरी के गौरव गाकर झर-झर

    मद में नस-नस उत्तेजित कर

    मोती की लड़ियों से मुन्दर

    झरते है झाग भरे निर्झर

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    कौन बार-बार अवलोकन कर रहा है?

    Solutions

    कविता में पर्वतों का बखान करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि मेखलाकार पर्वत अपने बड़े बड़े नयनों से सब कुछ देख रहे हैं। अतः इस आधार अपर सही विकल्प पर्वत है।

     

  • Question 7/10
    1 / -0

    प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है

    Solutions

    मानव प्रधानत: अपनी अनुभुतियों तथा मनोवेगों की अभिव्यक्ति मौखिक भाषा में ही करता है क्योंकि भावों की अभिव्यक्ति का साधन साधारणत: उच्चरित भाषा ही होती है। मौखिक अभिव्यक्ति से तात्पर्य मन के विचारों को स्वतंत्र रूप से बोल कर अभिव्यक्त करने से है।

    मौखिक अभिव्यक्ति के महत्त्व:

    • मौखिक भाषा ही अभिव्यक्ति का सहज व सरलतम माध्यम है तथा भाषा की शिक्षा मौखिक भाषा से प्रारम्भ होती है।
    • मौखिक भाषा के द्वारा विचारों के आदान-प्रदान से नई-नई जानकारियाँ मिलती हैं। व्यक्ति बोलचाल के द्वारा ही ज्ञान-अर्जित करता है। 

    Important Point

    'कहानी सुनकर उसे अपनी भाषा में कहना' प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है क्योंकि कहानी के मौखिक वर्णन करने के दौरान बच्चे:

    • वास्तविक अनुभव के साथ भाषाई कौशलों को सुगमता से ग्रहण करेंगें।
    • तथ्यों को स्वयं के निजी अनुभवों से जोड़ कर अपने विचारों को अभिव्यक्त करेगें।
    • स्वतंत्र एवं मौलिक अभिव्यक्ति के अवसर प्राप्त कर अपने विचारों को खुल कर रखेंगे।

    अतः निष्कर्ष निकलता है कि 'कहानी सुनकर उसे अपनी भाषा में कहना' प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गतिविधि है।

    Additional Information

    प्राथमिक स्तर पर बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास करने की दृष्टि से अन्य महत्त्वपूर्ण गतिविधि:​

    • कहानी कविता को बोलकर सुनाने के अवसर व उन पर बातचीत करने के अवसरों की उपलब्धता हो।
    • बच्चों की मौखिक अभिव्यक्ति का विकास के लिए उन्हे अपनी बात कहने, बातचीत करने की आजादी व अवसर हों।
    • बच्चों को समृद्ध भाषिक परिवेश की उपलब्धता, जिसमें उन्हे सुनने-बोलने, पढ़ने-लिखने के अधिक से अधिक अवसर हों। 
    • हिंदी में सुनी गयी बात, कविता, खेल-गीत, कहानी आदि को अपने तरीके और अपनी भाषा में कहने-सुनने के अवसर उपलब्ध हों। 

     

  • Question 8/10
    1 / -0

    भाषा-अर्जन के सम्बन्ध में कौन-सा कथन उचित नहीं है?

    Solutions

    भाषा-अर्जन उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसमें बालक भाषा को ग्रहण करने व समझने की क्षमता अर्जित करता है।

    Important Point

    • बालक के शब्दों एवं वाक्य प्रयोग के साथ ही भाषा को ग्रहण करने की क्षमता अर्जित होने लगती है।
    • भाषा-अर्जन एक अवचेतन प्रक्रिया है, सभी बच्चों में भाषा-अर्जन की स्वभाविक क्षमता होती है।
    • भाषा-अर्जन एक स्वभाविक प्रक्रिया है, भाषा-अर्जन बालक बिना विद्यालय जाये भी कर लेता है।
    • इसमें बालक के सीखने की प्रक्रिया व्याकरणीय नियमों से पूर्णतः अनभिज्ञ रहती है।
    • बालक वातावरण और लोगों के बीच अन्तःक्रिया से भाषा अर्जित करता है।
    • अतः भाषा-अर्जन को सहज बनाने के लिए समृध्द भाषिक परिवेश होना चाहिए।
    • बालक भाषा-अर्जन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए नियमों को आत्मसात् करते हैं।

    ​अतः, भाषा अर्जित करने के संदर्भ में बच्चों को नियम बनाना सिखाया जाता है, कथन उचित नहीं है।

     

  • Question 9/10
    1 / -0

    भाषा शिक्षक का विशेष अनिवार्य गुण है-

    Solutions

    शिक्षक, शिक्षा के कार्यान्वयनकर्ता होते हैं इसलिए उन्हें विभिन्न गुणों से परिपूर्ण होना चाहिए ताकि उनके द्वारा शिक्षण प्रक्रिया को सही दिशा मिल सके। वैसे तो सभी गुण सभी शिक्षकों में होने चाहिए परंतु, भाषा शिक्षक में एक विशेष गुण 'उच्चारण की शुद्धता' का होना अनिवार्य है।

    • शुद्ध उच्चारण करने वाला भाषा शिक्षक ही बच्चों के उच्चारण संबंधी अशुद्धता को दूर कर सकता है।
    • भाषा शिक्षक को विभिन्न भाषाओं की सभी ध्वनियों और उच्चारण स्थानों का भी ज्ञान होना चाहिए ताकि बच्चों में उच्चारण संबंधी दोषों को दूर किया जा सके।

    शिक्षक के अन्य गुण:

    • सुंदर लेख
    • प्रभावशाली वक्ता
    • भाषा में पर्याप्त रुचि

    अतः स्पष्ठ है भाषा शिक्षक का अनिवार्य गुण शुध्द उच्चारण है।

     

  • Question 10/10
    1 / -0

    प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं है:

    Solutions

    भाषा शिक्षण बच्चों में बच्चों में संप्रेषण कुशलता तथा मौलिकता को विकसित कर उन्हें विभिन्न संदर्भों में भाषा प्रयोग में सफल बनाने से संबंधित है। प्राथमिक स्तर पर भाषा के द्वारा प्राप्त आधारभूत कौशल दूसरे क्षेत्रों के संप्रत्ययों को समझने में सहायक होता है। भाषा शिक्षण का उद्देश्य भाषा की समझ और अभिव्यक्ति का विकास करना है।

    प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण का उद्देश्य बच्चों में भाषा की समझ और सहज अभिव्यक्ति के विकास को सुनिश्चित करना होता है। यह बच्चों में संप्रेषण कौशल को दक्ष करती है जिससे बच्चे विभिन्न संदर्भ में भाषा प्रयोग में सफल होते हैं। अपने मनोभाव को किसी के सामने आसानी से रख पाना ही भाषा शिक्षण को सार्थक बनाता है।

    Important Point

    प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण के कुछ मुख्य उद्देश्य:

    • बच्चे शब्दों का प्रभावशाली प्रयोग कर सके
    • बच्चे लिखी/छपी सामग्री को पढ़ और समझ सके
    • बच्चों में संप्रेषण कुशलता का विकास हो सके
    • बच्चे विभिन्न संदर्भ में भाषा प्रयोग में सफल हो सके
    • बच्चों के लेखन में मौलिकता का समावेश हो सके
    • बच्चों को हिंदी के विविध रूपों से परिचित कराया जा सके
    • बच्चे भाषा के द्वारा अपने परिवेश एवम् अनुभव को समझ सके
    • बच्चों में भाषा की समझ तथा सहज अभिव्यक्ति का विकास हो सके

    Hint

    •  व्याकरण के नियमों को कंठस्थ करना कतई ही भाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं है क्योंकि यह रटने पर बल देता है और यह किसी भी तरह से शिक्षण के लिए उपयुक्त नहीं है। 

    अतः, निष्कर्ष निकलता है कि व्याकरण के नियमों को कंठस्थ करना प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा शिक्षण का उद्देश्य नहीं है।

     

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