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CTET 2021 Hindi Test - 37
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CTET 2021 Hindi Test - 37
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    Directions For Questions

    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    इनमें से कौन सा शब्द समूह से भिन्न है?

    Solutions

    शब्द समूह ‘साहित्यिक, तार्किक व स्वाभाविक’ विशेषण हैं तथा शब्द ‘अभिव्यक्ति’ संज्ञा है। अतः सही विकल्प ‘अभिव्यक्ति’ है।

     

  • Question 2/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    ‘आज की तालीम भी इसी दौंड़ में साथ दे रही है।’ वाक्य में निपात है।

    Solutions

    किसी भी बात पर अतिरिक्त भार या महत्त्व देने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं उसे निपात (अवधारक) कहते हैं। निपात में ‘भी, तो, तक, केवल, ही, मात्र आदि’ शब्दों का प्रयोग किया जाता है। अतः वाक्य में प्रयुक्त निपात ‘भी’ है। अतः सही विकल्प ‘भी’ है।

     

  • Question 3/10
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    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    ‘विकसित’ शब्द में प्रत्यय है।

    Solutions

    ‘विकसित’ शब्द का मूल शब्द ‘विकास’ है तथा प्रत्यय ‘इत’। अतः सही विकल्प ‘इत’ है।

     

  • Question 4/10
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    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    अनुच्छेद के आधार पर कहा जा सकता है कि आधुनिक शिक्षा का नतीजा

    Solutions

    प्रस्तुत अनुच्छेद के अनुसार आधुनिक शिक्षा में शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर ऐसे विषय पर ध्यान दिया जा रहा है जो मनुष्य को एकतरफा विकास की तरफ धकेल रहा है जिनके परिणाम नकारात्मक एवं दुःखद हैं। अतः सही विकल्प ‘दुःखद’ है।

     

  • Question 5/10
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    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    आधुनिक शिक्षा में किस विषय को सबसे अधिक महत्त्व दिया जाता है?

    Solutions

    प्रस्तुत अवतरण के अनुसार ‘आधुनिक शिक्षा में विकसित विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है’। अतः सही विकल्प ‘विज्ञान को’ है।

     

  • Question 6/10
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    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    अनुच्छेद के आधार पर हमें किस पर सर्वाधिक ध्यान देने की जरूरत है?

    Solutions

    प्रस्तुत अनुच्छेद के अनुसार कला प्रवृति पर सर्वाधिक ध्यान देने की ज़रूरत है ताकि अच्छी और स्वस्थ मानसिकता विकसित होकर समाज व्यवस्थित और सुखी हो सके। अतः इस अनुसार सही विकल्प ‘कला प्रवृति पर’ है।

     

  • Question 7/10
    1 / -0

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    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    अनुच्छेद के अनुसार गणित, भूगोल, इतिहास आदि विषय

    Solutions

    प्रस्तुत अनुच्छेद के अनुसार ‘गणित, भूगोल, इतिहास आदि’ विषय तर्क प्रधान हैं और वर्तमान में इनपर हमारी एकमात्र श्रद्धा है। अतः विकल्प ‘तर्क प्रधान हैं’ सही है।

     

  • Question 8/10
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    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    ज्ञान-विज्ञान को बहुत अधिक महत्त्व देने के कारण

    Solutions

    प्रस्तुत अनुच्छेद के अनुसार ‘ज्ञान-विज्ञान को बहुत अधिक महत्व देने के कारण समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है’। अतः विकल्प ‘समाज में विभाजन हो रहा है’ सही है।

     

  • Question 9/10
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    निर्देश: नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    आधुनिक शिक्षा का नतीजा हमने देख लिया। हमने उस शिखा का नतीजा भी देख लिया, जिसमें ‘विकसित विज्ञान’ का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान है, जिसके कारण व्यक्ति को कहीं भी या कितना भी या कितना भी मिलने के बावजूद तृप्ति नहीं होती। इसका कारण यही है कि शिक्षा के स्वाभाविक और आवश्यक अंगों को छोड़कर हमने ऐसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जो मनुष्य का एकतरफा विकास करते हैं। जिनके कारण व्यक्तित्व का बड़े – से – बड़ा भाग अतृप्त रह जाता है। बाल्यावस्था में भी कला- शिक्षा को अभी तक उचित स्थान नहीं मिला है। जहाँ मिलता भी है, वहाँ बच्चों के गयारह-बारह वर्ष के होते ही उसके शिक्षा – क्रम में से कला – प्रवृत्तियों को निकाल दिया जाता है। ऐसा ही हर्बर्ट रीड ने कहा है:

    “हमारा अनुभव हमें बताता है कि हर व्यक्ति गयारह साल की उम्र के बाद, किशोर-अवस्था और उसके बाद भी सारे जीवन – काल तक किसी-न-किसी कला-प्रवृत्ति को अपने भाव-प्रकटन का जरिया बनाये रख सकता है। आज के सभी विषय – जिन पर हम अपनी एकमात्र श्रध्दा करते हैं, जैसे गणित, भूगोल, इतिहास, रसायनशास्त्र और यहाँ तक कि साहित्य भी – जिस तरह पढ़ाये जाते हैं, उन सबकी बुनियाद तार्किक है। इन पर एकमात्र जोर देने के कारण कला – प्रवृत्तियाँ, जो भावना-प्रधान होती हैं पाठ्यक्रम से करीब-करीब निकल जाती हैं। ये प्रवृत्तियाँ केवल पाठ्यक्रम से ही नहीं निकल जातीं बल्कि इन तार्किक विषयों को महत्त्व देने के कारण व्यक्ति के दिमाग से भी बिलकुल निकल जाती हैं। किशोर-अवस्था को इस तरह गलत रास्ते पर ले जाने का नतीजा भयानक हो रहा है। सभ्यता रोज-ब-रोज बेढव होती जा रही है। व्यक्ति का गलत विकास हो रहा है। उसका मानस स्वस्थ है, परिवार दुखी है। समाज में फूट पड़ी है और दुनिया पर ध्वंस करने का ज्वर चढ़ा है। इन भयानक अवस्थाओं को हमारा ज्ञान-विज्ञान सहारा दे रहा है। आज की तालीम भी इसी दौड़ में साथ दे रही है।”

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    किशोरावस्था तार्किकता की प्रधानता और भाव के अभाव में ______ का रास्ता अपना रही है।

    Solutions

    प्रस्तुत अनुच्छेद के अनुसार कला की प्रवृत्तियाँ सिर्फ तार्किक विषयों को प्रधानता देने के कारण, भाव के अभाव में किशोरावस्था पतन की ओर अग्रसर हो रही है। अतः सही विकल्प ‘पतन’ है।

     

  • Question 10/10
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    भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में सबसे कम महत्त्वपूर्ण है-

    Solutions

    भाषा की पाठ्य-पुस्तक साधन है साध्य नहीं। भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में सबसे कम महत्त्वपूर्ण भाषा की पाठ्य-पुस्तक है ।

    Key-Points

    • भाषा सीखने के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक भाषा के प्रयोग के लिए अवसरो की उपलब्धता है।
    • बालक ऐसे परिवेश में सरलता व सहजता से सीखता है, जो भाषा से समृद्ध हो।
    • भाषा का आकलन भी भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में  बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, आकलन ही भाषा सीखने के उद्देश्यों को आधार प्रदान करता है। 

    Important Point

    भाषा सीखने के लिए महत्त्वपूर्ण शिक्षण पद्धतियाँ-

    • बच्चों द्वारा अपनी भाषा में कही गयी बातों को हिंदी भाषा में दोहरानेे के अवसरों की उपलब्धता
    • हिंदी भाषा की बारीकियों पर चर्चा 
    • सक्रिय और जागरूक बनाने वाली रचनाएँ, अखबार, पत्रिकाएँ, फिल्म और ऑडियो-विडियो देखने, सुनने, पढ़ने, लिखने और चर्चा करने (बोलने) के अवसरों की उपलब्धता 
    • हिंदी भाषा में संदर्भ के अनुसार भाषा विश्लेषण (व्याकरण, वाक्य संरचना, विराम चिन्ह आदि) करने के अवसर 
    • साहित्य और साहित्यिक तत्वों की समझ बढ़ाने के अवसर 
    • कल्पनाशीलता और सृजनशीलता को विकसित करने वाली गतिविधियों जैसे रोल प्ले, अभिनय, कविता पाठ, सृजनात्मक लेखन, विभिन्न स्थितियों में संवाद आदि के अवसर 
    • सांस्कृतिक महत्व के अवसरों पर अवसरानुकूल लोकगीतों की प्रस्तुती

    अतः निष्कर्ष निकलता है कि भाषा सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में सबसे कम महत्त्वपूर्ण है-भाषा की पाठ्य-पुस्तक

     

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