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दाण् + क्त का प्रत्यययुक्त पद दत्त: होता है | क्त प्रत्यय का त शेष रहता है |
पच् धातु में क्त प्रत्यय जोडने पर पक्व: रूप बनता है | क्त प्रत्यय का त शेष रहता है |
प्रयुक्त वाक्य का संस्कृत अनुवाद है- वनं सर्वत: वृक्षा: सन्ति। सर्वतः के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।
प्रयुक्त वाक्य का संस्कृत अनुवाद है- शीतलं जलं सर्वेभ्यः रोचते। रुच् धातु के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।
दशपूली का विग्रह दशानां पुलानां समाहारः होगा । यह द्विगु समास का उदाहरण है ।
दिश: अम्बरं यस्य स: इसका सामासिकपद दिगम्बर: होगा ।
'देवार्च्यः’ = देव + अर्च्यः अत्र अ+अ= आ दीर्घवर्ण: भवति | अक् (अ,इ,उ,ऋ,लृ) प्रत्याहारस्य पश्चात् यदि सवर्ण: स्वरः स्यात् तर्हि द्वयो: मेलनेन दीर्घसन्धि: भवति |
वृक्षात्पतति इत्यस्य सन्धिविच्छेद: वृक्षात् + पतति इति अस्ति।
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